बेसिक शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा विभाग

चयन और प्रोन्नत वेतनमान के लाभ से वंचित हैं शिक्षक


चयन और प्रोन्नत वेतनमान के लाभ से वंचित हैं शिक्षक

शिक्षक छात्रों को उनके सपनों को प्राप्त करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इसलिए इन्हें राष्ट्र निर्माता कहा जाता है। वे न केवल छात्रों का भविष्य संवारते हैं, बल्कि देश के भविष्य को भी आकार देते हैं। जब बात आती है शिक्षक समस्याओं के निस्तारण की, तो उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिलता है। नतीजा वर्षों से वे मानसिक तनाव झेल रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि उनसे शिक्षण कार्य के अलावा बहुत सारे काम लिए जाते हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है। अवशेष वेतनमान, चयन वेतनमान व प्रोन्नत वेतनमान के लाभ से सभी शिक्षक वंचित हैं। सर्विस बुक अधूरी पड़ी हुई है। जिले के तमाम विद्यालय जर्जर हो गए हैं। बोले बहराइच मुहिम के तहत हिन्दुस्तान ने शिक्षकों से बात की तो उन्होंने समस्याओं की झड़ी लगा दी।

बेसिक शिक्षक

जिले के बेसिक राक्षक विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। समस्याओं क पूरा करने के लिए वे वर्षों से मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं की जा रही है जिससे वे हमेशा मानसिक तनाव में रहते हैं। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष विद्या विलास पाठक ने कहा कि शिक्षकों के अवशेष वेतन, चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान समय पर भुगतान होना चाहिए। शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य में आने वाली बाधाओं की यदि शिकायत की जाए तो उसे प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए। विकासखंड स्तर, जनपद स्तर, राज्य शिक्षक संगठनों से प्रतिमास निश्चित बैठक होनी चाहिए और जो समस्याएं वहां चिन्हित की जाएं उनका निराकरण समयबद्ध रूप से करनी चाहिए।

संगठन 20 साल से मांग करता चला आ रहा है की शिक्षक को केवल शिक्षण कार्य करने दिया जाए। शिक्षक की नियुक्ति केवल शिक्षण के लिए ही हुई है। शेष किसी प्रकार के कार्य न लिए जाएं, लेकिन अभी तक सरकार ने यही मांग पूरी नहीं की है। यही शिक्षा में सुधार की मूल आवश्यकता है। यह मांग पूरी हो जाए तो शिक्षण व्यवस्था पूर्ण रूप से सही हो जाएगी। इसके अतिरिक्त विद्यालय व्यवस्था को राजनीति से दूर रखी जानी चाहिए। प्रधान का हस्तक्षेप विद्यालय व्यवस्था में कदापि नहीं होना चाहिए। सफाई कर्मचारी न होने की वजह से विद्यालयों में स्वच्छता कमी है। चौकीदार न होने की वजह से सुरक्षित वातावरण नहीं मिल पा रहा है। प्रति कक्षा एवंविषयवार अध्यापक न होने की वजह से शिक्षण कार्य प्रभावित है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में एक पूर्ण कालिक हेड मास्टर होना चाहिए। ऑनलाइन कार्य के लिए विद्यालय में क्लर्क की व्यवस्था होनी चाहिए। अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों को एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट मिलना चाहिए। शिक्षकों को विद्यालय में आवासीय व्यवस्था देनी चाहिए या उनके आवास के निकटतम 8 किलोमीटर में नियुक्ति देनी चाहिए।

जर्जर भवनों व ऊपर से गुजरी हाईटेंशन लाइनों से हर समय खतरा : जिलाध्यक्ष ने कहा कि विद्यालय नीति बनाते समय शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी को सम्मिलित किया जाना चाहिए। विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति के लिए अभिभावक को जिम्मेदार बनाना चाहिए तथा ग्राम प्रधान व ग्राम सभा सदस्यों को जागरूकता के लिए प्रतिबंधित करना चाहिए। अभिभावकों को जो सरकारी लाभ मिलते हैं वह तभी मिलना चाहिए जब उनके बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आएं। जब तक विद्यालय के लिए परमानेंट सफाई कर्मी नियुक्त न हो तब तक के लिए जो ग्राम समाज के लिए सफाई कर्मी नियुक्त है। उसे प्रतिदिन विद्यालय में

विद्यालयों में चोरियां बढ़ीं गंभीरता से नहीं ले रहे थानेदार

जिलाध्यक्ष ने बताया कि बेसिक विद्यालयों में चोरी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। विशेष प्रकोष्ठ थाने में बनना चाहिए जिससे विद्यालय में चोरी की घटनाएं न हो। विद्यालय में चोरी होने पर शिक्षकों की कोई बात थाने पर गंभीरता से नहीं ली जाती है जिससे असुरक्षा का वातावरण बनता है। निर्माण या मरम्मत आदि का कार्य किसी अन्य निर्माण एजेंसी से करनी चाहिए। इसमें शिक्षकों को कदापि नहीं लगना चाहिए। शिक्षकों को पुरानी पेंशन देना चाहिए। अगर संगठनों की मांग पर विचार करते हुए समय से निराकरण कर दिया जाए, तो निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी। शिक्षकों का 10 साल से पदोन्नति न किया जाना शिक्षा जगत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं। शिक्षण के लिए बनने वाली हर व्यवस्था में शिक्षक संगठनों की भागीदारी निश्चित करनी चाहिए। शिक्षकों के सुझाव धरातलीय होते हैं। एसी कमरों में ऐसे अधिकारियों के साथ जिनको व्यवहारिक कोई अनुभव नहीं होती है उनके द्वारा बनाई गई नीति कभी भी व्यावहारिक नहीं हो सकती। इसीलिए अब तक जितनी भी बेसिक शिक्षा में प्रयोग किए गए हैं वह असफल सिद्ध हुए।

जिलाध्यक्ष ने कहा कि निर्माण कार्य, भोजन, जलकल, विद्युत व्यवस्था छात्रों की उपस्थिति सहित पचासों कार्य जो शिक्षकों से कराए जा रहे हैं जब तक इनको इससे मुक्त नहीं किया जाएगा तब तक शिक्षण व्यवस्था में सुधार होना संभव नहीं है। अधिकारियों का निरीक्षण आर्थिक उत्पीड़न करने का नहीं बल्कि सुधारात्मक होना चाहिए। शिक्षण करना हमारा कर्म सिद्ध अधिकार है। इसे हमें मिलना ही चाहिए।

सफाई के लिए भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। अभियान चलाकर जर्जर विद्यालयों को ध्वस्त कर नियमित समय के बाद नवीन विद्यालय बनाकर देना चाहिए। विद्युत आपूर्ति के लिए अलग लाइन चाहिए, जो विद्यालय समय में विद्युत आपूर्ति हो सके। विद्यालयों के अगल-बगल या उनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनों को हटाया जाना चाहिए। अगर कभी नया तार निकल रहा हो, तो विद्यालय से कम से कम 100 मीटर दूर निकालना चाहिए। प्रस्तुति- ध्रुव शर्मा


Related Articles

Leave a Reply

Back to top button