बेसिक शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा विभाग

UP Schools admission by rte: अब इन बच्चों को यूपी के स्कूलों में नहीं मिलेगा दाखिला, RTE के तहत फ्री एडमिशन को लेकर नए निर्देश जारी


UP Schools admission by rte: अब इन बच्चों को यूपी के स्कूलों में नहीं मिलेगा दाखिला, RTE के तहत फ्री एडमिशन को लेकर नए निर्देश जारी

Schools: अब इन बच्चों को यूपी के स्कूलों में नहीं मिलेगा दाखिला, RTE के तहत फ्री एडमिशन को लेकर नए निर्देश जारीराज्य ब्यूरो, लखनऊ। निजी स्कूलों में दुर्बल, अलाभित समूह व एक लाख रुपये वार्षिक आय वाले परिवार के बच्चों को निश्शुल्क प्रवेश दिलाने के लिए लागू शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के नियम अब और सख्त किए गए हैं। अपात्रों को लाभ लेने से रोकने के लिए अब शिक्षा विभाग के साथ ही दाखिल प्रमाण पत्रों की जांच संबंधित विभाग भी करेंगे। दोहरे सत्यापन के साथ ही बच्चे और अभिभावक का आधार कार्ड भी अनिवार्य कर दिया गया है।विद्यालयों द्वारा पात्रों को प्रवेश देने में लापरवाही पर भी कार्रवाई का प्रविधान है। निजी स्कूलों में प्रवेश न मिलने की शिकायतें मुख्यमंत्री के जनता दरबार में उठती रहीं हैं। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर में कुछ बच्चियों का निजी स्कूल में प्रवेश मिल पाया। इसी अनुभव के बाद ये बदलाव किए गए हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सरकार की यह पहल शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार द्वारा मंगलवार को जारी शासनादेश के मुताबिक, आरटीई के आवेदनों का आनलाइन पोर्टल के माध्यम से दो स्तर पर सत्यापन किया जाएगा। अभी तक इसका सत्यापन खंड शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी करते थे। अब इसमें अन्य विभागीय जांच भी शामिल किया गया है।
UP Schools admission by rteसंबंधित विभाग ने प्रमाणपत्रों को अस्वीकार किया तो आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह आनलाइन होगी। फर्जी दस्तावेज (आय, जाति आदि प्रमाणपत्र) के आधार पर दाखिला कराने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गलत सत्यापन करने वाले संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।शैक्षणिक सत्र शुरू होने से चार माह पहले ही जिला स्तर पर दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। जिन निजी स्कूलों में पूर्व प्राथमिक शिक्षा दी जाती है, वहां 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के तहत आरक्षित होंगी। प्रवेश का वार्षिक लक्ष्य, जिले में सभी निजी विद्यालयों की न्यूनतम प्री-प्राइमरी या कक्षा एक की सीटों के योग का 25 प्रतिशत होगा।स्कूलों को अपनी खाली सीटों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। पहले की तरह सभी चयनित बच्चों की सूची सार्वजनिक की जाएगी। अभिभावकों को किताब और ड्रेस खरीदने के लिए हर साल पांच हजार रुपये सीधे बैंक खाते में मिलेंगे। स्कूल द्वारा आवंटित बच्चे को बिना कारण प्रवेश न देने पर उसकी मान्यता रद हो सकती है।प्रवेश मिलने के बाद स्कूल को बच्चे की जानकारी आरटीई पोर्टल और यू-डायस पोर्टल पर दर्ज कर अपार आइडी बनानी होगी, तभी स्कूल को शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा। जिला स्तरीय अधिकारी, सभी प्रतिपूर्ति बिल और मांग पत्र का सत्यापन करेंगे। खंड शिक्षा अधिकारी हर तिमाही स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण कर बच्चों की उपस्थिति जांचेंगे।पहली बार अनुश्रवण समिति बनीआरटीई में प्रवेश को लेकर सख्त निगरानी व्यवस्था की गई है। पहली बार जिला स्तर पर 11 अधिकारियों की क्रियान्वयन और अनुश्रवण समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। इसके अलावा प्रवेश संबंधी विवादों के निस्तारण के लिए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की गई है। आरटीई में जो प्रमाणपत्र लगाए गए हैं, उन्हें स्कूल भी आनलाइन पोर्टल पर देख सकेंगे।आरटीई में ये कर सकेंगे आवेदन-वार्षिक आय एक लाख रुपये तक वाले परिवार।-अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग।-अनाथ, निराश्रित, एचआइवी/एड्स व कैंसर पीड़ित अभिभावकों के बच्चे।– दिव्यांगजन परिवार।-आवेदन केवल http://www.rte25.upsdc.gov.in पोर्टल पर होंगे।आयु सीमा (राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार)-नर्सरी : तीन से चार वर्ष-एलकेजी (लोअर किंडरगार्टन): चार से पांच वर्ष-यूकेजी (अपर किंडरगार्टन): पांच से छह वर्ष-कक्षा एक : छह से सात वर्षफीस प्रतिपूर्ति पहले जैसी हीआरटीई के तहत स्कूलों को मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रति बच्चे के लिए अधिकतम 5400 रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित है। अभिभावकों से स्कूल किसी भी अतिरिक्त शुल्क की मांग नहीं करेंगे।इस वर्ष 75 प्रतिशत बच्चों को मिला प्रवेशइस वर्ष 75.43 प्रतिशत बच्चों को प्रवेश मिला है। कुल आवंटित 1,85,675 सीटों में 1,40062 बच्चों को प्रवेश दिए गए। करीब 24 प्रतिशत बच्चों को विभिन्न कारणों से प्रवेश नहीं मिल पाया। इसमें प्रमाणपत्रों की कमी, विद्यालयों की ओर से प्रवेश लेने से मना करने और पसंद का विद्यालय नहीं मिलने पर अभिभावकों की ओर से रुचि नहीं लेना कारण रहा है।


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