PM SHRI Scheme: उत्तर प्रदेश के 1129 परिषदीय स्कूलों में हाई-टेक होंगी ‘आईसीटी लैब’ और डिजिटल लाइब्रेरी
PM SHRI Scheme: उत्तर प्रदेश के 1129 परिषदीय स्कूलों में हाई-टेक होंगी ‘आईसीटी लैब’ और डिजिटल लाइब्रेरी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को तकनीक के साथ जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘पीएम श्री’ (PM SHRI) योजना के तहत प्रदेश के चयनित 1129 परिषदीय कंपोजिट विद्यालयों में आईसीटी (ICT) लैब और 570 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी के सुचारू संचालन के लिए आवर्ती अनुदान (Recurring Grant) जारी करने की अनुमति प्रदान कर दी गई है।
राज्य परियोजना निदेशक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस बजट का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में स्थापित तकनीकी संसाधनों का रखरखाव और शिक्षण प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाना है।
आवंटित बजट और प्रमुख सामग्री (प्रति विद्यालय)
क्र संसामग्री/मदविवरणबजट (अनुमानित)1पावर बैकअप02 KVA इन्वर्टर और 02 बैटरियां₹ 38,0002स्टेबलाइजर05 KVA (वोल्टेज सुरक्षा हेतु)₹ 11,0003प्रिंटरमल्टी-फंक्शन प्रिंटर₹ 33,5004इंटरनेट30 MBPS ब्रॉडबैंड (जनवरी-मार्च 2026)₹ 3,0005हार्ड डिस्क1 TB पोर्टेबल हार्ड डिस्क₹ 5,0006फर्नीचरटेबल, कुर्सी और अलमारी₹ 30,0007रखरखावआईसीटी लैब की छोटी मरम्मत व सुरक्षा₹ 5,000
निगरानी और जवाबदेही के कड़े निर्देश
दस्तावेजों के अनुसार, इस योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं:
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग: स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के उपयोग की ट्रैकिंग ‘डैशबोर्ड’ के माध्यम से की जाएगी। विद्यालयों को दैनिक उपयोग की रिपोर्ट NBDIUP पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
- प्रशिक्षण: शिक्षकों को तकनीक में दक्ष बनाने के लिए जनवरी से मार्च 2026 के बीच 01 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) पर आयोजित किया जाएगा।
- समय सीमा: आवंटित धनराशि को 03 दिनों के भीतर स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के खातों में स्थानांतरित करने और सामग्री की खरीद 01 माह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
- व्यय विवरण: खर्च की गई राशि का पूरा विवरण 05 फरवरी, 2026 तक प्रबंध पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है।
डिजिटल लर्निंग पर जोर
इस पहल का उद्देश्य केवल उपकरण खरीदना नहीं, बल्कि छात्रों में कंप्यूटर संचालन की बुनियादी समझ विकसित करना है। शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे ‘निपुण भारत मिशन’ और ‘कायाकल्प’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए डिजिटल सामग्री (Digital Content) का अधिकतम प्रयोग करें।
साथ ही, स्कूलों में होने वाली ‘शिक्षक संकुल’ बैठकों में भी इन डिजिटल संसाधनों का प्रदर्शन (Demo) अनिवार्य कर दिया गया है।
नोट: इन संसाधनों के रखरखाव और बिल-वाउचरों के सुरक्षित रख-रखाव की जिम्मेदारी विद्यालय स्तर पर तय की गई है, जिसका समय-समय पर जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाएगा।
आवंटित बजट की सूची देखे / डाउनलोड करें


