प्रेरणा पोर्टल पर पहली कक्षा में बच्चों के दाखिले शून्य
प्रेरणा पोर्टल पर पहली कक्षा में बच्चों के दाखिले शून्य
प्राइमरी स्कूलों के प्रधानाध्यापक व शिक्षक पहली कक्षा में दाखिले लेने वाले बच्चों का ब्योरा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है। जिसके चलते 467 स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले बच्चों की संख्या प्रेरणा पोर्टल पर शून्य है। बीएसए ने कक्षा-एक में दाखिला लेने वाले बच्चों का ब्योरा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड न करने ऐतराज जताया है। प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को नए दाखिले की संख्या बढ़ाने और पोर्टल ब्योरा अपलोड करने के निर्देश दिये हैं।

लखनऊ
जिले में संचालित नगर और ग्रामीण क्षेत्र के 1566 प्राइमरी व अपर स्कूलों में 1,22,808 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन पहली कक्षा में दाखिले की रफ्तार काफी धीमी है। आठ मई को बीएसए की ओर से जारी पत्र में 467 स्कूलों में पहली क्लास के बच्चों की संख्या शून्य है। इसके अलावा 28 स्कूलों में केवल दो-दो, 19 स्कूलों में तीन-तीन, 15 स्कूलों में चार-चार और सिर्फ आठ स्कूल ऐसे हैं, जहां पांच-पांच बच्चों का दाखिला हो पाया है।
कम नामांकन के यह हैं कारण: शिक्षकों का कहना है कि पहली कक्षा में प्रवेश के लिए छह वर्ष की आयु अनिवार्यता भी एक बड़ी वजह बन रही है। पहले कम उम्र के बच्चों को भी प्रवेश मिल जाता था, लेकिन अब आयु सीमा के कारण कई बच्चों का दाखिला नहीं हो पा रहा। इसके अलावा आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों के अभिभावकों को प्रदेश सरकार किताबों, यूनिफॉर्म व बैग के लिये प्रति बच्चे ₹पांच हजार रुपये की वार्षिक राशि अभिभावकों के सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। जबकि प्राइमरी स्कूल के बच्चों के अभिभावकों को सिर्फ 1200 रुपये ही मिलते हैं। प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक पूरे वर्ष गैर शैक्षणिक काम में लगे रहते हैं। स्कूलों में बच्चों की नियमित कक्षाएं नहीं चल पाती हैं।
दाखिला लेने वाले बच्चों का ब्योरा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड नहीं किये जाने से संख्या शून्य दिख रही है। जबकि सभी स्कूलों में दाखिले 60% हो चुके हैं। अभी दाखिले चल रहे हैं। नामांकन बढ़ाने निर्देश दिए हैं। विपिन कुमार, बीएसए