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NCERT Book Row: एनसीईआरटी कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र ने दिया सभी कक्षाओं की किताबों की समीक्षा का आदेश


NCERT Book Row: एनसीईआरटी कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र ने दिया सभी कक्षाओं की किताबों की समीक्षा का आदेश

एनसीईआरटी द्वारा जारी की गई कक्षा 8 की नई सोशल साइंस की किताब को लेकर उठे विवाद पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एनसीईआरटी की सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा शुरू कर दी गई है।


सरकार का कहना है कि अब बिना विशेषज्ञों की जांच के कोई भी सामग्री प्रकाशित नहीं की जाएगी।

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि केंद्र ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद को निर्देश दिया है कि वह सभी कक्षाओं की किताबों की व्यापक समीक्षा करे। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने सुझाव दिया कि अगर केंद्र सरकार इस काम के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करे तो यह अधिक उचित होगा।

क्या है पूरा NCERT कक्षा 8 सोशल साइंस बुक विवाद

एनसीईआरटी ने हाल ही में कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक “समाज की खोज: भारत और उससे आगे” (भाग-II) प्रकाशित की थी। इस पुस्तक में अध्याय IV “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शामिल था, जिसमें न्यायपालिका से जुड़े कुछ ऐसे संदर्भ और उदाहरण दिए गए थे, जिन्हें लेकर विवाद खड़ा हो गया, इस विवाद का मुख्य कारण ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ टॉपिक था। इस टॉपिक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में इस पाठ्यक्रम की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए शिकायत की गई थी।

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के कंटेट पर सुप्रीम कोर्ट में शिकायत

एनसीईआरटी की नई कक्षा 8वीं की सोशल साइंस बुक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का चैप्टर जोड़े जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी सर्वोच्च न्यायालय में शिकायत की थी, जिसमें कहा गया कि, इस बात से विचलित हैं कि बच्चों को इस प्रकार की सामग्री पढ़ाई जा रही है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की बात कहते हुए यह भी कहा कि, स्कूल की किताबों में बदलाव करते समय पारदर्शिता और विशेषज्ञों की राय जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

11 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि पाठ्यक्रम की समीक्षा सीधे NCERT से करवाने के बजाय इसके लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाई जानी चाहिए। अदालत का मानना है कि विशेषज्ञ समिति पाठ्यक्रम और किताबों का अधिक निष्पक्ष और शैक्षणिक आधार पर मूल्यांकन कर सकती है।

केंद्र सरकार का जवाब

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुकी है। उनके मुताबिक, एनसीईआरटी में व्यवस्थागत बदलाव शुरू किए गए हैं, जिसमें सभी कक्षाओं की किताबों की व्यापक समीक्षा की जा रही है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, डोमेन एक्सपर्ट्स का पैनल पाठ्यक्रम की जांच करेगा और विशेषज्ञों की मंजूरी के बिना कोई भी नई सामग्री प्रकाशित नहीं होगी।

NCERT में क्या बदलाव किए जा रहे हैं

केंद्र सरकार के अनुसार शिक्षा सामग्री को अधिक संतुलित और प्रमाणिक बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं, जिसमें विषय विशेष ज्ञों की निगरानी में कंटेंट तैयार करना, किताबों के प्रकाशन से पहले अकादमिक जांच, पाठ्यक्रम की समय-समय पर समीक्षा और इतिहास और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में तथ्यात्मक सटीकता सुनिश्चित करना जैसे काम शामिल हैं।

छात्रों और स्कूलों पर क्या असर पड़ेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सभी कक्षाओं की किताबों की समीक्षा होती है तो आने वाले समय में स्कूल पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि छात्रों की पढ़ाई पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा और बदलाव केवल विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही लागू किए जाएंगे।


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