यूपी शिक्षक स्थानांतरण: मनमर्जी पर रोक, अब ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ और ‘2-टीचर फॉर्मूला’ से होगा समायोजन


 यूपी शिक्षक स्थानांतरण: मनमर्जी पर रोक, अब ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ और ‘2-टीचर फॉर्मूला’ से होगा समायोजन

प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया अब केवल डिजिटल आंकड़ों के भरोसे नहीं होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए नई समय-सीमा और कड़े मानक तय किए हैं। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना और डेटा की विसंगतियों को समाप्त करना है।

1. ‘2-टीचर फॉर्मूला’: हर स्कूल में होंगे कम से कम दो शिक्षक

राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता अब ‘जीरो टीचर’ या ‘सिंगल टीचर’ स्कूलों को खत्म करना है। नई नीति के अनुसार:

2. UDISE डेटा की होगी जमीनी जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन)

पूर्व में शिक्षकों ने शिकायत की थी कि यू-डायस (UDISE) पोर्टल का डेटा त्रुटिपूर्ण है। इसे गंभीरता से लेते हुए अब:

3. महत्वपूर्ण तिथियां और पारदर्शिता

स्थानांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने एक ‘टाइमलाइन’ जारी की है:

4. सरप्लस शिक्षक और महिला सुरक्षा को प्राथमिकता

इस चरण में स्थानांतरण का दायरा सीमित रखा गया है:

5. न्यायालय का रुख और अगली सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि स्थानांतरण दंडात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार के लिए होने चाहिए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 मई 2026 को तय की है।

विशेष नोट: तब तक कोर्ट द्वारा दी गई पुरानी राहत या स्टे प्रभावी रहेगा। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया डेटा-आधारित और तर्कसंगत होनी चाहिए।


शासन के इस कदम से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है जो तकनीकी खामियों के कारण गलत समायोजन का डर सता रहा था। अब सारा दारोमदार 30 अप्रैल तक होने वाले फिजिकल वेरिफिकेशन पर टिका है।


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