करदाता को नोटिस का देना होगा जवाब

करदाता को नोटिस का देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आयकर दाता वित्तीय प्रतिबद्धताओं के लिए जवाबदेह
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करदाता के लिए समन का अनुपालन करना और कर प्राधिकरण की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब देना जरूरी है। आयकर अधिनियम, 1961 के तहत करदाता से तात्पर्य किसी भी व्यक्ति या संस्था से है, जो कर भुगतान या वित्तीय प्रतिबद्धताओं के लिए कानूनी तौर पर जवाबदेह है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि सिर्फ समन जारी करने से जारीकर्ता विभाग या प्राप्तकर्ता यह सुनिश्चित नहीं कर पाते कि कार्रवाई शुरू हो गई
है। किसी करदाता को केंद्रीय या राज्य कर विभाग से समन या कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, तो करदाता प्रथमदृष्टया उपस्थित होकर और जैसा मामला हो, वैसी अपेक्षित प्रक्रिया का अनुपालन करने के लिए बाध्य है। पीठ ने आर्मर सिक्योरिटी नामक सार्वजनिक लि. कंपनी की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
पीठ ने कहा, अगर करदाता को पता चलता है कि संबंधित मामले में पहले ही कोई अन्य अधिकारी या विभाग जांच कर रहा है, तो उसे बाद में जांच शुरू करने वाले प्राधिकारी को इसकी जानकारी देनी होगी। संबंधित कर अधिकारी ऐसी सूचना मिलने के बाद करदाता के दावे की सत्यता की पुष्टि के लिए एक-दूसरे से बात करेंगे। इससे अनावश्यक दोहराव से वचा जा सकेगा। विभाग के समय, प्रयास और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
