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उम्मीद खत्म: तदर्थ शिक्षकों को अब न नौकरी, न ही वेतन


अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों में हैं तैनात।

शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने 2000 के बाद की नियुक्तियों के संबंध में साफ की स्थिति

प्रयागराज । वर्ष 2000 के बाद प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों में तैनात तदर्थ शिक्षकों को वेतन मिलने की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ . सरिता तिवारी ने अनु सचिव उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर तदर्थ शिक्षकों पर स्थिति स्पष्ट कर दी है । कहा है कि इन शिक्षकों को सेवा में बनाए रखना वेतन दिया जाना नियम संगत नहीं है । गौरत है कि कुछ ही दिन पहले जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को पत्र लिखकर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का वेतन तत्काल रोकने का आदेश दिया है।

सरकार को भेजे पत्र में कहा तदर्थ शिक्षकों को वेतन दिया जाना नियम संगत नहीं

शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ . सरिता तिवारी ने अनु सचिव यूपी शासन को पत्र लिखकर स्पष्ट बताया है कि तदर्थ शिक्षकों को नियमित नहीं किया जा सकता एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह के प्रश्न के जवाब में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने प्रशिक्षित स्नातक ( टीजीटी प्रवक्ता ( पीजीटी ) भर्ती 2021 में ऐसे तदर्थ शिक्षकों को अवसर प्रदान किया गया था नियुक्ति के आधार पर भारांक देते हुए सफल तदर्थ शिक्षकों को नियमित शिक्षक के रूप में पैनल व कार्यभार ग्रहण कराए जाने के आदेश जारी किए गए हैं । सुप्रीम कोर्ट के सात दिसंबर 2021 के आदेश में परीक्षा में असफल या प्रतिभाग न करने वाले तदर्थ शिक्षकों के विनियमित की कोई व्यवस्था नहीं है । इस प्रकार 30 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को सेवा में बनाए रखना या वेतन दिया जाना नियम संगत नहीं है । इससे पूर्व से नियुक्त एवं वर्तमान में कार्यरत ऐसे शिक्षक जो कोर्ट के अंतरिम आदेश से वेतन प्राप्त कर रहे हैं , उनके विनियमितीकरण के संबंध में वित्त एवं न्याय विभाग की सहमति नहीं है ।


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