शिक्षा का अधिकार देने में छोटे जिले अव्वल, बड़े फिसड्डी

शिक्षा का अधिकार देने में छोटे जिले अव्वल, बड़े फिसड्डी
आरटीई के तहत प्रवेश देने में श्रावस्ती अव्वल
टाप फाइव में शामिल नहीं हो सका कोई बड़ा जिला
लखनऊः गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) देने में छोटे जिलों ने बड़ों को पीछे छोड़ दिया है। लक्ष्य के सापेक्ष 98.92 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश देकर श्रावस्ती पूरे प्रदेश में टाप पर रहा है। गोंडा दूसरे, बस्ती तीसरे, फिरोजाबाद चौथे और बलरामपुर पांचवे नंबर पर है।
शिक्षा का अधिकार के तहत बच्चों का प्रवेश कराने पर प्रदेश सरकार लगातार जोर दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही जनता दर्शन में मुरादाबाद की एक बच्ची का निजी स्कूल में निश्शुल्क दाखिला कराया और पढ़ाई का खर्च भी उठाया। विभाग ने अब आरटीई में बेहतर प्रदर्शन करने वाले टाप जिलों की सूची जारी की है। इसमें शैक्षिक सत्र 2025-26 में श्रावस्ती को 465 बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में कराने का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष 460 बच्चों का प्रवेश कराया गया है। लक्ष्य के सापेक्ष प्रतिशत के मामले में श्रावस्ती पहले नंबर पर है। इसके बाद गोंडा में 2079 बच्चों के प्रवेश के लक्ष्य के मुकाबले 1975 प्रवेश हुए हैं, जो लक्ष्य के सापेक्ष 95 प्रतिशत है। तीसरे नंबर पर बस्ती में 553 बच्चों का दाखिला हुआ, यह 591 बच्चों के प्रवेश के लक्ष्य के सापेक्ष 93.57 प्रतिशत है। चौथे नंबर पर फिरोजाबाद ने 4,358 के लक्ष्य के सापेक्ष 4,060 बच्चों का दाखिला कराया है, जो लक्ष्य के सापेक्ष 93.16 प्रतिशत है। पांचवे नंबर पर बलरामपुर में 712 बच्चों का प्रवेश कराया गया है, जो 771 के लक्ष्य के सापेक्ष 92.35 प्रतिशत है। वहीं राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख जिले इनसे काफी पीछे रह गए हैं। प्रदेश सरकार ने आरटीई के तहत परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन को प्रभावा तरीके से लागू करने का दावा किया है। आरटीई के तहत प्रत्येक विद्यालय में न्यूनतम एक शिक्षक या सहयोगी उपलब्ध होना आवश्यक है।