स्कूल 80% लक्ष्य पाने पर बनेंगे निपुण

स्कूल 80% लक्ष्य पाने पर बनेंगे निपुण
लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। प्रदेश के वही परिषदीय विद्यालय निपुण माने जाएंगे जहां बच्चों की उपस्थिति 80 फीसदी या उससे ऊपर होगी, कक्षाओं में विषयों का माहवार पाठ्यक्रम पूरा हो चुका होगा तथा मूल्यांकन और उपचारात्मक कक्षाएं अनिवार्य रूप से ली गई होंगी। इन सारे मानकों को इस साल दिसम्बर तथा अगले वर्ष फरवरी में होने वाले मूल्यांकन के दौरान परखा जाएगा।
इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि कक्षा दो तक के बच्चे पढ़ने, समझने और गणना में दक्ष हो सकें। विद्यालयों में पाठ्य पुस्तक के साथ वर्कबुक, मैथ चार्ट और भाषा किट्स का उपयोग करते हुए छात्र-छात्राओं में तर्क, अनुमान और जीवन से जोड़ने की क्षमता विकसित की जाएगी। इस संबंध में स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) और जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्रधानाचार्यों के नाम सर्कुलर जारी कर दिया है। सर्कुलर में इस बात के विशेष निर्देश दिए गए हैं कि हर खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के 21 स्कूलों को ‘निपुण विद्यालय’ के रूप में विकसित करेंगे जबकि प्रत्येक शिक्षक संकुल, एसआरजी वएआरपी को 10 विद्यालयों में मूल शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए मिशन निपुण के उद्देश्यों को लागू करना होगा। शिक्षकों को प्रशिक्षण के अनुसार शिक्षण पद्धतियों को कक्षा में अपनाने, छात्रों की प्रगति का सतत आकलन करने और रिमेडियल क्लासेस चलाने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रधानाध्यापकों के संग करनी होगी हर माह बैठक
सर्कुलर में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि ‘लर्निंग एट होम’ को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों के साथ-साथ एसआरजी व एआरपी को भी बच्चों के अभिभावकों से संवाद बनाने को कहा गया है। साथ ही, विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठकों के माध्यम से सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने को कहा गया है। इसके अलावा खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रति माह चौथे शनिवार को प्रधानाध्यापकों के साथ मासिक समीक्षा बैठक करनी होगी।