बेसिक शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा विभाग

कनिष्ठ शिक्षक को प्रधानाध्यापक का प्रभार देने पर फंसेंगे बीएसए, बेसिक शिक्षा परिषद के कुछ स्कूलों में ऐसा हुआ है


कनिष्ठ शिक्षक को प्रधानाध्यापक का प्रभार देने पर फंसेंगे बीएसए, बेसिक शिक्षा परिषद के कुछ स्कूलों में ऐसा हुआ है

कनिष्ठ शिक्षक को प्रधानाध्यापक का प्रभार देने पर फंसेंगे बीएसए, बेसिक शिक्षा परिषद के कुछ स्कूलों में ऐसा हुआ हैराज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के कुछ विद्यालयों में सुनियोजित तरीके से कनिष्ठ शिक्षकों को प्रधानाध्यापक पद का प्रभार दिया जाना विभाग के लिए समस्या बन गया। प्रधानाध्यापक पद का कार्य करने के कारण कुछ कनिष्ठ शिक्षक प्रधानाध्यापक पद का वेतन दिए जाने की मांग को लेकर कोर्ट पहुंच गए।इस स्थिति पर अपर मुख्य सचिव (एसीएसस) ने निर्देश दिए कि विद्यालयों में वरिष्ठतम शिक्षक को प्रधानाध्यापक का प्रभार दिया जाए। अब उनके निर्देश पर बेसिक शिक्षा परिषद सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) एवं बीएसए से चार जनवरी को दोपहर 12 बजे तक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची मांगी है। जिन जिलों से वरिष्ठता सूची नहीं मिलेगी, उनकी पांच जनवरी को एसीएस अलग से वीडियो क्रांफ्रेंसिग के माध्यम से समीक्षा करेंगे।


Charge of Basic schoolकुछ जिले के कुछ विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षकों को दरकिनार कर कनिष्ठ शिक्षकों को प्रधानाध्यापक पद का प्रभार दिया गया। इस संबंध में कुछ शिकायतें जिले से लेकर परिषद कार्यालय तक की गई हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। ऐसे में कनिष्ठ शिक्षकों ने प्रधानाध्यापक पद पर कार्य करने के कारण उसी अनुरूप वेतन देने की मांग रख दी।इसके अलावा प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य कर रहे वरिष्ठ शिक्षकों ने भी काम के अनुरूप वेतन की मांग की। इस पर बीते माह अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर पूछा गया कि विद्यालयों में वरिष्ठतम शिक्षक कौन हैं और प्रधानाध्यापक न होने पर उन्हें प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाया गया है या नहीं। यदि नहीं तो वरिष्ठतम शिक्षक को अविलंब प्रभार दिया जाए। इससे बीएसए एवं खंड शिक्षाधिकारियों की कनिष्ठ को प्रभारी बनाने की मनमानी पर अंकुश लग गया।अब वरिष्ठता सूची समय पर न देने वाले जिले और मंडलों की समीक्षा एसीएस अलग से करेंगे। इससे यह भी पता चलेगा कि किन जिलों ने आदेश के अनुपालन में लापरवाही बरती


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