NPS को लेकर फैली भ्रांतियों पर वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा अयोध्या द्वारा शिक्षकों-कर्मचारियों को दी गई विस्तृत जानकारी


NPS को लेकर फैली भ्रांतियों पर वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा अयोध्या द्वारा शिक्षकों-कर्मचारियों को दी गई विस्तृत जानकारी

अयोध्या में बेसिक शिक्षा के शिक्षकों-कर्मचारियों को दी गई विस्तृत जानकारी

अयोध्या। नई पेंशन योजना (NPS) को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों में फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा, अयोध्या ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। इसमें एनपीएस से जुड़ी प्रमुख जानकारियों को स्पष्ट करते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सूचना अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत एनपीएस से आच्छादित शिक्षकों और कर्मचारियों तक अनिवार्य रूप से पहुंचाएं।

2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर अनिवार्य है एनपीएस

जारी कार्यालय ज्ञाप में बताया गया है कि 1 अप्रैल 2005 या उसके बाद राज्य सरकार की सेवा में आए सभी कर्मचारियों पर एनपीएस अनिवार्य रूप से लागू है। यह कोई वैकल्पिक योजना नहीं है। सेवा ग्रहण करने के अगले माह से ही एनपीएस की कटौती शुरू हो जाती है।

कटौती, ब्याज और निवेश को लेकर स्पष्ट जानकारी

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कारणवश कर्मचारी या नियोक्ता का अंशदान समय पर एनपीएस खाते में अपडेट नहीं होता है, तो देरी की अवधि पर चक्रवृद्धि ब्याज देय होगा। साथ ही एनपीएस फंड का निवेश एसबीआई, यूटीआई और एलआईसी जैसी विश्वसनीय संस्थाओं में किया जाता है, जिससे जोखिम न्यूनतम रहता है।

कर छूट और सरकारी अंशदान की जानकारी

स्पष्टीकरण में बताया गया है कि—

सेवानिवृत्ति और मृत्यु पर मिलने वाले लाभ

एनपीएस के तहत:

निकासी और पेंशन से जुड़े प्रावधान

कार्मिक सेवा अवधि में अधिकतम तीन बार अपने अंशदान का 25 प्रतिशत तक निकासी कर सकता है। वहीं, शेष 40 प्रतिशत कॉर्पस से पेंशन की व्यवस्था होती है, जो कार्मिक या उसके आश्रित की मृत्यु के बाद वैध उत्तराधिकारी को दी जाती है।

रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश

वित्त एवं लेखाधिकारी ने सभी एनपीएस से आच्छादित शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे एनपीएस रजिस्ट्रेशन हेतु आवेदन पत्र भरकर समय से जमा करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या न हो।


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