UPI से बड़ी रकम करना चाहते हैं ट्रांसफर, बैंकों ने लगाई IVR चेक, जानिए वजह


UPI से बड़ी रकम करना चाहते हैं ट्रांसफर, बैंकों ने लगाई IVR चेक, जानिए वजह

ई दिल्ली. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जैसे ही आप बड़ी रकम ट्रांसफर करने जाते हैं, अचानक मोबाइल पर एक कॉल आ जाती है और कई लोग सोच में पड़ जाते हैं कि अब क्या हो गया? कहीं पेमेंट अटक तो नहीं जाएगी?

दरअसल यह कॉल किसी तकनीकी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि आपकी कमाई को सुरक्षित रखने की कोशिश का हिस्सा है. UPI के रिकॉर्ड तोड़ इस्तेमाल के बीच बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए बैंक अब हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर IVR वेरिफिकेशन को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

UPI IVR SERVICE

देश में जैसे-जैसे यूपीआई का दायरा बढ़ा है, वैसे-वैसे धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ा है. इसी खतरे को कम करने के लिए अब बैंक हाई-वैल्यू UPI ट्रांजैक्शन पर IVR यानी ऑटोमेटेड कॉल वेरिफिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं. जब कोई यूजर बड़ी रकम ट्रांसफर करता है, तो बैंक पहले एक कॉल करके कंफर्म करता है कि ट्रांजैक्शन सच में उसी यूजर ने किया है या नहीं.

रिकॉर्ड UPI ट्रांजैक्शन, बढ़ा फ्रॉड का रिस्क
डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2025 में UPI ने रिकॉर्ड लेवल छू लिया. उस महीने करीब 21.6 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 30 लाख करोड़ रुपये रही.

NPCI के नए नियम क्या कहते हैं
नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नए फ्रेमवर्क के तहत कुछ ट्रांजैक्शन में लिमिट बढ़ाई गई है. यह 15 सितंबर, 2025 को लागू हुआ.

IVR रुकावट नहीं, सुरक्षा की ढाल
इंडियाटुडे से बात करते हुए फिनटेक एक्सपर्ट रोहित महाजन ने बताया कि IVR को परेशानी मानना गलत है. फिशिंग, SIM-swap और सोशल इंजीनियरिंग जैसे फ्रॉड के बढ़ते मामलों में IVR एक जरूरी सेफ्टी लेयर है, जो पैसे ट्रांसफर होने से पहले यूजर की मंशा कंफर्म करता है.

कब और क्यों ट्रिगर होता है IVR कॉल
बैंक सिर्फ रकम देखकर IVR नहीं लगाते.

सुरक्षित और भरोसेमंद UPI की दिशा में कदम
एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई-बेस्ड IVR सिस्टम रियल-टाइम में फ्रॉड रोकने में मदद कर रहे हैं. जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट बढ़ेंगे, वैसे-वैसे स्पीड और सिक्योरिटी के बीच बैलेंस बनाए रखना जरूरी होगा और IVR इसी का हिस्सा है.


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