विद्यालय पेयरिंग से संबंधित दिशा निर्देश जारी
विद्यालय पेयरिंग से संबंधित दिशा निर्देश जारी

विद्यालय पेयरिंग से सम्बन्धित बिन्दु
शासनादेश में वर्णित पेयरिंग व्यवस्था से नयी शिक्षा नीति को और अधिक प्रभावी किया जाएगा। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की अधिक उपलब्धता होगी, भौतिक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ेगी। पर्याप्त छात्र नामांकन उपस्थिति से पियर लर्निंग के अवसर बढ़ेगें तथा ग्रामीण परिवेश में लर्निंग गैप कम होगा। लखनऊ मण्डल में अधिकांशतः सभी विद्यालय सही शिफ्ट किये गये हैं, कुछ मुद्दे जिनके समावेश से नीति को और उपयोगी बनाया जा सकता है
निम्नवत् हैः-
- उ0प्र0 निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2011 (द्वितीय संशोधन-2017) के नियम-4 के अनुसार बस्ती से विद्यालय की दूरी 01 किमी रखा जाना उचित होगा।
2. शासनादेश में छात्र संख्या का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाये। 50 से अधिक छात्र संख्या के विद्यालयों की पेयरिंग न की जाये।
3. यदि ग्राम पंचायत में एक ही स्कूल है तो उसको पेयरिंग से बाहर रखा जाए।
4. हाई-वे, रेलवे लाइन या नदी-नालों के आर-पार पेयरिंग न की जाये। यदि किया गया है तो संशोधन कर लिया जाये।
5. जिन विद्यालयों में छात्रों की शिफ्टिंग की जा रही है वहाँ संख्या के अनुरूप आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता (Facility mapping) जैसे कक्ष, शौचालय आदि की पुष्टि कर ली जाए।
- शिफ्ट किये जा रहे विद्यालय को यदि बालवाटिका के रूप में उपयोग किया जाना है, तो वहाँ से क्या संसाधन शिफ्ट किये जाने हैं वह क्या छोड़े जाने है यह भी स्पष्ट किया जाय।
7. विलय के बाद कुछ विद्यालयों में छात्र शिक्षक अनुपात (पी०टी०आर०) अनुरूप अथवा प्रतिकूल हो सकता है। अतः आगामी शिक्षक समायोजन में विलय किये गये विद्यालयों में छात्र शिक्षक अनुपात (पी०टी०आर०) का विशेष ध्यान रखा जाए।
- दूरी एवं मूलभूत संसाधनों का पुनः सत्यापन कर लिया जाये। जहां बड़ी विसंगति हैं, वहां तत्काल कोर्स करेशन भी किया जाये।
मण्डल स्तर पर सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को (सीतापुर को छोड़कर) निर्देश दिया गया है कि दूरी एवं छात्र संख्या तथा अवस्थापना सुविधाओं को ध्यान में रखकर पेयरिंग किये गये स्कूलों का परीक्षण कर लें तथा त्रुटिपूर्ण होने पर संशोधन किया जाए।