निपुण विद्यालय डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड प्रक्रिया शुरू, यहाँ देखें अपना रिजल्ट Nipun School Certificate
निपुण विद्यालय डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड प्रक्रिया शुरू, यहाँ देखें अपना रिजल्ट Nipun School Certificate
निपुण विद्यालय डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड प्रक्रिया शुरू, यहाँ देखें अपना रिजल्ट
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा निपुण भारत मिशन के तहत निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले विद्यालयों के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए हैं। अब प्रधानाध्यापक और स्कूल इंचार्ज घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से अपने विद्यालय का गौरव पत्र (सर्टिफिकेट) डाउनलोड कर सकते हैं।

सर्टिफिकेट डाउनलोड करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
यदि आपका विद्यालय निपुण घोषित हो चुका है, तो आप निम्नलिखित चरणों का पालन करके सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं:
- आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ: सबसे पहले निपुण प्रेरणा की आधिकारिक वेबसाइट https://nipun.prernaup.in/ पर लॉगिन करें।
- यूजर क्रेडेंशियल भरें: * User Name: विद्यालय के प्रधानाध्यापक या इंचार्ज का प्रेरणा पोर्टल पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें।
- Password: पासवर्ड के रूप में भी अपना वही रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर ही डालें।
- सर्टिफिकेट प्राप्त करें: लॉगिन सफल होने के बाद डैशबोर्ड पर आपको ‘Download Nipun Certificate’ का विकल्प दिखाई देगा, जहाँ से आप इसे सेव या प्रिंट कर सकते हैं।
निपुण रिजल्ट और प्रगति रिपोर्ट कैसे देखें?
उन विद्यालयों के लिए जो अभी निपुण होने की प्रक्रिया में हैं, यह पोर्टल आत्म-अवलोकन का एक बेहतरीन माध्यम है। आप इसी लॉगिन के जरिए:
- अपने विद्यालय का विस्तृत निपुण असेसमेंट रिजल्ट चेक कर सकते हैं।
- यह जान सकते हैं कि किन कक्षाओं या छात्रों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें
नोट: लॉगिन केवल उसी मोबाइल नंबर से संभव होगा जो प्रेरणा पोर्टल (Prerna Portal) पर आधिकारिक रूप से दर्ज है। यदि लॉगिन में ‘Invalid Credentials’ की समस्या आ रही है, तो कृपया अपने ब्लॉक के BRC या तकनीकी टीम से संपर्क करें।
प्रधानाध्यापकों के लिए निर्देश
समस्त प्रधानाध्यापक और इंचार्ज शिक्षकों से अनुरोध है कि वे समय रहते अपना सर्टिफिकेट डाउनलोड कर लें और इसे विद्यालय के नोटिस बोर्ड या गौरव पट्ट पर प्रदर्शित करें। यह न केवल विद्यालय की उपलब्धि है, बल्कि शिक्षकों और छात्रों के कड़े परिश्रम का प्रमाण भी है।